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Sunday, 16 September 2018

Chapter =1 प्रकाश का परावर्तन (Reflections of light)

प्रकाश का परावर्तन 【Reflections of light】

  • आ हम पढेंगे की " प्रकाश का परावर्तन "किसे कहते हैं परंतु ये जानने से पहले हम ये जान ले की प्रकाश क्या हैं?
    प्रकाश :-  प्रकाश  एक ऊर्जा है  जो हमेेशा सीधी रेखा में चलती है|                                                                            दूसरे शब्दों में कहे तो -प्रकाश वह कारक है जिसकी सहायता से हम किसी वस्तु वो अपनी आँखों से देख पाते हैं|



       नोट:- प्रकाशीय दृष्टि से वस्तु तीन प्रकार की होती है :- 1 पारदर्शी 【transparent】
    2 पारभाषी【translucent】
    3 अपारदर्शी【opaque】
         •पारदर्शी (transparent):- वह पदार्थ जिनसे हो कर 
    प्रकाश पार कर जाये उन्हें पारदर्शी कहते है|जैसे :-काँच, पानी,हवा  इत्यादि।
      • पारभाषी(translucent):-वह वस्तु जिनसे हो कर प्रकाश के कुुछ उन्हें पारभाषी कहते है।जैसे:- सूती वस्त्र, आँख,रक्त ,दूध,तेल 
     • अपादर्शी(opaque):- वह वस्तू जिनसे प्रकाश पार न कर सके, उन्हें अपारदर्शी कहते है। जैसे :- पत्थर,लकड़ी,ईट, दीवाल,आदि।

     * प्रकाश का परावर्त्तन:- प्रकाश का किसी वस्तू से टकड़ा कर वापस लौटने कि घटना, प्रकाश का परावर्त्तन कहलाती है

    • किरण(rays):- प्रकाश की छोटी इकाई किरण कहलाती है तथा किरणों का समूह  "किरणपुंज (beam)" कहलाता है।ये  तीन प्रकार के होते  है-
    • 1 समान्तर किरणपुंज (parallel beam)
    • 2 अपसारी किरणपुंज(diverging beam)
    • 3 अभीसारी किरणपुंज (converging beam)
    सामंतर किरणपुंज (parallel beam):-जब प्रकाश की किरणे एक दूसरे के समान्तर गमन करती है तो उन्हें समान्तर किरण पुंज कहतेे है।

      अपसारी किरणपुंज (diverging beam):- जब प्रकाश की किरणें किसी स्त्रोत से निकल कर फैलती चली जाये उसे अपसारी किरणपुंज कहते है।

      अभिसारी किरणपुंज(converging beam ):- जब प्रकाश कि किरणे किसी एक बिंदु पर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है उसे अभिसारी किरणपुंज कहते हैै।

              प्रकाश के परावर्तन सम्बंधित मुख्य तथ्य



    * आपतित किरण ( incident ray) :- किसी सतह पर पड़ने वाली किरण ,आपतित किरण कहलाती है।

    परावर्तित किरण (reflected ray ) :- किसी सतह से टकराकर जो किरण वापस लौती है उसे परावर्तित किरण कहते है।
    आपतन बिदु (point of incidence):- किसी सतह के जिस बिंदु पर आपतित किरण पड़ती है उस बिंदु को आपतन बिंदु कहते है।

    अभिलंब (normal):- आपतन बिंदु पर डाले गए लम्ब को अभिलम्ब कहते है।

    आपतन कोण (angle of incidence):- आपतित किरण और अभिलंब के बीच बने कोण को अभिलंब कहते है।

    परावर्तन कोण (angle of Reflection ):- परावर्तित किरण और अभिलंब के बीच बने कोण को परावर्तन कोण कहते है।

                               परावर्तन के नियम


      *  जब प्रकाश किसी सतह से टकरा कर वापस लौटती है तो कुछ नियमो का पालन करती है ,जिसे परावर्तन का नियम कहते है। परावर्तन के दो नियम होते है जो इस प्रकार है-

    1 आपतित किरण,परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर डाला गया लम्ब तिनो एक ही तल में होते है।

    2 आपतन कोण ,परावर्तन कोण के बराबर होता है।

                       प्रतिबिम्ब (Image)

      * प्रतिबिम्ब का शाब्दिक अर्थ :- प्रति मतलब "वस्तु " और बिम्ब मतलब " छाया " अर्थात वस्तु की छाया को ही प्रति बिम्ब कहते है।

    * किसी स्रोत से आती हुई प्रकाश की किरणें  दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु पर मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है  उसे उस बिंदु का प्रतिबिम्ब कहते है।
               



    * प्रतिबिम्ब दो प्रकार के होते हैं -
    1 काल्पनिक या आभासी प्रतिबिम्ब (virtual Image)
    2 वास्तविक प्रतिबिम्ब ( Real image )

    काल्पनिक प्रतिबिम्ब :- जब प्रकाश कि  किरणें दर्पण से परावर्तन के बाद किसी बिंदु पर मिलती हुुुई प्रतीत होती है,उसे  काल्पनिक प्रतिबिंब कहते है।
    * इसकी मुख्य विशेषताए इस प्रकार है -
    1 काल्पनिक प्रतिबिम्ब को पर्दे पर प्राप्त नही किया जा सकता है।
    2 काल्पनिक प्रतिबिम्ब हमेशा सीधा बनता है।
    3 इसे टूटी हुई रेखा द्वारा दिखाया जाता है।
    4 यह हमेशा दर्पण के पीछे बनता है।

    वास्तविक प्रतिबिम्ब :- जब प्रकाश कि किरणे दर्पण से परावर्त्तन के बाद जिस बिंदु पर वास्तव में मिलती है, उसे वास्तविक प्रतिबिंब  कहते है।
    * वास्तविक प्रतिबिम्ब कि कुछ विशेषताए इस प्रकार है-
    1 वास्तविक प्रतिबम्ब हमेशा उल्टा बनता है।
    2 इसे पर्दे पर प्राप्त किया जा सकता है।
    3 यह हमेशा दर्पण के सामने उल्टा बनता है।

    * समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब की विशेषता


     समतल दर्पण से बने प्रतिबिम्ब की निम्न विशेषताये इस प्रकार है-
    1 समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिम्ब आभाषी (काल्पनिक) होता है।
    2 प्रतिबिम्ब का आकार वस्तु के आकार के बराबर होता है।
    3 प्रतिबिम्ब वस्तु की अपेक्षा सीधा बनता है।
    4 प्रतिबिम्ब दुरी ,वस्तु दुरी के बराबर होती है।
    5 प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनता है।

    प्रकीर्णन (scattering) :- वह प्रकिया जिसमे प्रकाश सुक्ष्म कणो (जैसे :- वायु के कण,धूलकण आदि) पर पड़ता है तो ये कण प्रकाश कि कुुुछ ऊर्जा को अवशोषित कर उसेे  चारो ओर फैला देते है ,इस घटना को ही प्रकीर्णन कहते है।
                      इस प्रक्रिया के कारण ही हम उन वस्तुओं को भी देख पाते है, जिन पर प्रकाश प्रत्यक्ष रूप से नही पड़ता है।

    गोलीय दर्पण (spherical Mirror )


    => काँच के किसी खोखले गोले को कलई (silvered) कर गोलिए दर्पण बनाया जाता है।
            दूसरे शब्दों में कहे तो - वह दर्पण जिसका परावर्तक सतह किसी खोखले गोले का भाग होता है, उसे गोलिए दर्पण कहते है।





    * गोलिए दर्पण से सम्बंधित कुछ मुख्य बाते इस प्रकार है-
    *ध्रुव (pole):-  गोलिए दर्पण का मध्य बिंदु ध्रुव कहलाता है। इसे  "p" से सूचित किया जाता है। जैसा की ऊपर के चित्र ने है।
    वक्रता केंद्र(centre of curvature) :- खोखले गोले के केंद्र को दर्पण का वक्रता केंद्र कहा जाता है। इसे "C" से सूचित किया जाता है। (उपरोक्त चित्र में है)

    वक्रता-त्रिज्या (radius of curvature):- गोले की त्रिज्या दर्पण की वक्रता-त्रिज्या कहलाती है। इसे "R" से सूचित किया जाता है। (उपरोक्त चित्र में)

    * प्रधान/ मुख्य अक्ष (principal axis) :- ध्रुव और वक्रता -केंद्र को मिलाने वाली रेखा प्रधान /मुख्य अक्ष कहलाती है।(उपरोक्त चित्र में)
    * फोकस तथा फोकस-दुरी (focal and focal-length):- मुख्य अक्ष के समान्तर आने वाली किरणे दर्पण से परावर्तन के बाद जिस बिंदु मिलती है या मिलती हुई प्रतीत होती है,उस बिंदु को फोकस कहते है।इसे "F" से सूचित किया जाता है।
                   तथा फोकस और ध्रुव के बीच की दुरी फोकस -दुरी कहलाती है। इसे "f" से सूचित किया जाता है।





                           गोलिए दर्पण के प्रकार 

    * गोलिए दर्पण के दो प्रकार होते है-
    1 उत्तल दर्पण (convex mirror)
    2 अवतल दर्पण (concave mirror)

    उत्तल दर्पण :- गोलिए दर्पण का वह भाग जिसका परावर्तक सतह उठा हुआ हो, उसे उत्तल दर्पण कहते है।




    उत्तल दर्पण का उपयोग स्कूटर ,बस,मोटरगाड़ी आदि के साइड मिरर के रूप में किआ जाता है, क्योंकि उत्तल दर्पण हमेशा वस्तु का सीधा (काल्पनिक) प्रतिबिम्ब बनाता है तथा इसका दृष्टि-क्षेत्र (field of vision) काफी फैला होता है क्योंकि यह बाहर की ओर वक्रीत होता है जिससे पीछे की वस्तु आसानी से हम देख पाते है, इसलिए साइड मिरर के रूप में इसका उपयोग किया जाता है।

    *अवतल दर्पण (concave mirror):-  गोलिए दर्पण का वह भाग जिसका परावर्तक सतह धसा हुआ हो उसे अवतल दर्पपण कहते है।

    *अवतल दर्पण के उपयोग  ढाढ़ी बनाने के रूप में ,टॉर्च,
    सर्च लाइट ,वाहनों के हेडलाइट ,सौर भट्ठी ,रोगियों के नाक, कान, गला,दाँत, के जाँच में आदि में किआ जाता है।
    *अवतल दर्पण से बने विभिन्न दुरियो पर प्रतिबिम्ब
    1 जब वस्तु दर्पण के फोकस और ध्रुव के बीच हो,तो उसका प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे ,सीधा,काल्पनिक,वस्तु से बड़ा बनता है।



    2 जब वस्तु फोकस पर हो ,तो उसका प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने ,उल्टा,वस्तु से बड़ा,अनन्त पर बनता है।


    3 जब वस्तु केंद्र पर हो तो उसका प्रतिबिम्ब केंद्र पर ही वस्तु के बराबर,वास्तविक,उल्टा,बनता है।


    4 जब वस्तु वक्रता-केंद्र और अनन्त के बीच स्थित हो तो उसका प्रतिबिम्ब वक्रता-केंद्र और फोकस के बीच ,वास्तविक,उल्टा,वस्तु से छोटा बनता है।

    *      फोकस-दुरी और वक्रता-त्रिज्या में सम्बन्ध 

    => फोकस-दुरी ,वक्रता-त्रिज्या की आधी होती है।अर्थात f=R/2

    * प्रमाण :-


    => माना कि B' अवतल दर्पण है जिसकी वक्रता-त्रिज्या R, वक्रता-केंद्र C और ध्रुव P है। प्रधान-अक्ष PC के समान्तर AB प्रकाश की किरण आ रही है। परावर्तन के नियम से,
                      /_ABC= /_CBF
                /_ABC= /_BCF (एकान्तर कोण से)
       •
    •    •  /_ CBF=/_BCF

    फलस्वरूप ∆BCF एक समद्विबाहु त्रिभुज है।
      •
    •  •    CF=BF
    यदि B, P के निकट हो,तो-

    PF=FC=PC/2 【जहाँ, PC=R, FC=f】

    f=R/2    proved.


    *आवर्धन (Magnification):- प्रतिबिम्ब की ऊँचाई(h') और वस्तु की ऊँचाई (h) के अनुपात को आवर्धन कहते है।इसे "m" से सूचित किया जाता है।

    m= h'/h या m= -v/u या h'/h=-v/u

    * जब 'm' का मान धनात्मक हो तो इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब आभासी है,परन्तु 'm' का मान ऋणात्मक हो तो इसका अर्थ है कि प्रतिबिम्ब वास्तविक है।



    => वस्तु-दुरी (u),प्रतिबिम्ब-दुरी(v) ,तथा फोकस-दुरी (f) के बीच सम्बन्ध दर्शाने वाले सूत्र को 'दर्पण-सूत्र' कहते है।
                    【 1/f=1/v+1/u 】 यह दर्पण सूत्र है।
    * अवतल दर्पण  की फोकस दुरी ऋणात्मक होती है।जबकि उत्तल दर्पण की फोकस-दुरी धनात्मक होती है।

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