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Sunday, 9 December 2018

पाठ-1 दही वाली मंगम्मा




=>  "दही वाली मंगम्मा" पाठ के लेखक "श्रीनिवास" जी है। इनका जन्म कर्नाटक में 6 जून 1891 इ में हुआ था। इनका पूरा नाम " मास्ती वेंकटेश अय्यंगार " है। इस अध्याय के सभी प्रश्नोत्तर नीचे दिए गए हैं-----

Q1. मंगम्मा का अपनी बहू के साथ किस बात को लेकर विवाद था?

उत्तर:- मंगम्मा का अपनी बहू के साथ बेटे पर अधिकार को लेकर विवाद था। मंगम्मा अपने बेटे पर से अपना हक नही छोड़ना चाहती थी जबकि बहु अपने पति पर हक जमाना चाहती थी और इसी बात को लेकर बहु अपने बेटे को पिट रही थी ,जिसे देख कर मंगम्मा ने अपनी बहू को भला बुरा कह दिया और उनके बीच विवाद उतपन्न हो गई।

Q2. रंगप्पा कौन था और वह मंगम्मा से क्या चाहता था?

उत्तर:- रंगप्पा मंगम्मा के ही गाँव का एक जुआरी था और वह मंगम्मा से कर्ज लेना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि मंगम्मा अपने बेटे और बहू से अलग रहती है तथा अपने पास पैसे भी रखती है। रंगप्पा माँ बेटे के बीच हुए झगडे का लाभ उठाना चाहता था।

Q3. बहु ने सास को मनाने के लिए कौन-सा तरीका अपनाया?

उत्तर:- बहु को मालूम हो गया था कि उसकी सास रंगप्पा को कर्ज देने वाली है तो बहु ने अपने बेटे को दादी के पास भेज कर उसे मनाने की तरकीब सोची क्योंकि बहु जानती थी कि मंगम्मा अपने पोते से बहुत प्यार करती है।

Q4. इस कहानी का कथावाचक कौन है? उसका परिचय दीजिए।

उत्तर:- लेखक की माँ इस कहानी की कथावाचक है।








Q5. मंगम्मा का चरित्र-चित्रण कीजिए।

उत्तर:- मंगम्मा ने कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि उसका बेटा अपनी पत्नी के दबाव में आकर उसे छोड़ देगा । मंगम्मा और उसकी बहु यह अच्छे से जानती थी कि पत्नी का श्रृंगार पति ही है। मंगम्मा भोली-भाली एक सहृदय नारी है। जो दही बेच कर अपना जीवन यापन करती थी और दही को ले कर वह एक गाँव से दूसरे गाँव में तथा शहरो में बेचने जाया करती थी इससे जो भी पैसे मिलते थे उसमे से कुछ का वह संचय भी करती थी क्योंकि उसे पता था कि यही मेरी पूंजी है । वह अपने पोते से भी काफी प्यार करती थी ।


Q6. कहानी का सारांश प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:- दही वाली मंगम्मा पाठ के लेखक श्रीनिवास जी है। इस कहानी का मुख्य चरित्र मंगम्मा और द्वितीय चरित्र लेखक की माँ है।  घर के समस्याओ से परेशान हो कर जीवन यापन के लिए दही बेचती है। वह गांव से शहर जा कर दही बेचा करती है तथा उन पैसे में से कुछ पैसा संचय भी करती है। माँ बेटे से अपना हक नही छोड़ना चाहती है और बहू अपने पति पर हक जमाना चाहती है ।इन्ही कारणों की वजह से बहु अपने बेटे को पीटती है जिसे देख कर मंगम्मा गुस्से से अपने बहु को भला बुरा बोल देती है और उनके बीच विवाद उतपन्न होजाती है।
         अतः इस कहानी से यह सीख मिलती है कि  हमे किसी भी परिस्थिति में अपने परिवार के सदस्यों से अलग नही रहना चाहिए तथा हमे हमेशा एक साथ मिलजुक कर रहना चाहिए।


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