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Saturday, 29 December 2018

पाठ-2 सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली


                सत्ता में साझेदारी की कार्यप्रणाली


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● सही विकल्प चुनें

प्रश्न 1. संघ राज्य की व्यवस्था नही है-

क) लिखित संविधान    ख) शक्तियों का विभाजन

ग) इकहरी शासन-व्यवस्था घ) उच्चतम न्यायपालिका


उत्तर:- इकहरी शासन व्यवस्था

प्रश्न 2. संघ सरकार का उदाहरण है--
क) अमेरिका   ख) चीन  ग) ब्रिटेन  घ) इनमे से कोई नहीं

उत्तर:- अमेरिका ।

प्रश्न 3. भारत में संघ एवम राज्यो के बीच अधिकारों का विभाजन कितनी सूचियों में हुआ है? 

क) संघीय सूची, राज्य सूची
ख) संघीय सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची

उत्तर:- संघीय सूची, राज्य सूची, समवर्ती सूची ।

● निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है।
1) सत्ता में साझेदारी सही है क्योंकि---
क) यह विवुधता को अपने में समेट लेती है
ख) देश की एकता को कमजोर करती है
ग) विभिन्न समुदाय के बीच टकराव कम करती है

उत्तर:- यह विविधता को अपने में समेट लेती है।

2) संघवाद लोकतंत्र के अनुकूल है---
क) संघीय व्यवस्था केंद्र सरकार की शक्ति को सिमित करती है।
ख) संघवाद एए बात की व्यवस्था करता है कि उस शासन व्यवस्था के अंतर्गत रहनेवाले लोगों में आपसी सौहार्द एवम विश्वास रहेगा ।उन्हें इस बात का भय नही रहेगा की एक की भाषा,संस्कृति और धर्म दूसरे पर लाद दी जाएगी

उत्तर:- ख

  ■ अति लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. संघ राज्य का अर्थ बताएं।

उत्तर :- जब कोई स्वतन्त्र एवम सम्प्रभु राज्य आपस में मिलकर सामान्य सप्रभुता को स्वीकार कर एक राज्य का गठन करते है,तो ऐसे राज्य संघ राज्य कहलाते हैं।



प्रश्न 2. संघीय शासन की दो विशेषताएं बताएं।

उत्तर:- संघीय शासन व्यवस्था की दो विशेषताएं इस प्रकार है-
1) संघीय शासन में सत्ता की सारी की शक्तियॉ केंद्र सरकार एवम उनकी इकाइयों में बंट जाती है।
2) संघीय शासन में दोहरी शासन होती है-- केंद्र सरकार और राज्य सरकार 
            केंद्र सरकार राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर ध्यान देती है जबकि राज्य सरकार अपने राज्य महत्व के विषयों पर ध्यान देती है।


■  लघु उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. सत्ता की साझेदारी से आप क्या समझते है? 

उत्तर :- राज्य के नागरिकों द्वारा सरकारी स्तर निर्णय लेने या निर्णय निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित करना ही सत्ता में साझेदारी कहलाता है।


प्रश्न 2. सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में क्या महत्व रखती है?

उत्तर :- सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र में काफी महत्व रखती है क्योंकि यह सुनिश्चित करती है कि सत्ता किसी समूह के हाथ में नही रहेगी।

प्रश्न 3. सत्ता की साझेदारी के अलग-अलग तरीके क्या है?

उत्तर:- लोकतंत्र में सरकार की सारी शक्तियॉ किसी एक अंग में नही होती है।बल्कि सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बंटवारा होता है। सरकार की शक्तियों का बंटवारा सरकार के तीनों अंग कार्यपालिका ,न्यायपालिका और विधायिका के बीच होता है।सत्ता के ऐसे बंटवारे से किसी एक अंग पर सत्ता जमाव एवम दुरूपयोग होने की संभावनाए कम होती है।

  ■ दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

प्रश्न 1. राजनैतिक दल किस तरह से सत्ता में करते है?

उत्तर :- राजनैतिक दल सत्ता में साझेदारी का सबसे जीवत स्वरूप है। वे सत्ता के बंटवारे का माध्यम होते हैं।राजनैतिक दल लोगों का ऐसा समूह है जो चुनाव लड़ने और राजनैतिक सत्ता हासिल करने के उद्देश्य से काम करता है उनकी आपसी लड़ाईया यह निश्चित करती की सत्ता किसी एक हाथ में न रहे। लोकतंत्र में सरकार की साडी शक्ति किसी एक अंग में सिमित नही रहती बल्कि सरकार के विभिन्न अंगों के बीच सत्ता का बंटवारा होता है। उदाहरण के लिए विधायिका,कार्यपालिका एवम न्यायपालिका एक ही स्तर पर अपनी-अपनी शक्तियों का प्रयोग करके सत्ता में साझेदारी बनते है।

प्रश्न 2. गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझेदारी कौन-कौन होते हैं?

उत्तर:- गठबंधन की सरकारों में सत्ता में साझेदारी विभिन्न राजनीतिक दल होते हैं।

प्रश्न 3. दबाव समूह किस तरह से सरकार को प्रभावित कर सत्ता में साझेदार बनते है? 

उत्तर:- लोकतंत्र में व्यपारी ,उद्योगपति ,किसान,शिक्षक जैसे संगठित समूह सरकार की विभिन्न समितियो में प्रतिनिधि बनकर सत्ता में भागीदारी करते है या अपने हितों के लिए सरकार पर दबाव डाल कर उनके फैसलो को प्रभावित कर सत्ता में अप्रत्यक्ष रुप से साझेदारी करते है।

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