=> "माँ" पाठ के लेखक ' ईश्वर पेटलीकर 'जी है ।
Q1. माँ मंगु को अस्पताल में क्यों नही भर्ती कराना चाहती ?विचार करे।
उत्तर:- मंगु की माँ अस्पताल के नाम से मन ही मन डरती थी क्योंकि वहाँ की व्यवस्था के कारण वह अस्पताल को गोशाला की उपमा देती थी और मंगु बिस्तर पर ही पखाना-पेशाब कर देती थी तथा बिना खाना खिलाये वह खाती भी नहीं थी । उसकी मां के मन में तरह तरह के सवाल उठे थे वे सोचती थी की अस्पताल वाले मेरी बेटी की अच्छे से देख भाल नही कर पाएगे ।इन्ही कारणों से वह अपनी बेटी को अस्पताल में भर्ती नही करवाना चाहती थी।
Q2. मंगु के प्रति माँ और परिवार के अन्य सदस्यों के व्यवहार में जो फर्क है।उसे अपने शब्दों में लिखे।
उत्तर:- मंगु एक पागल लड़की थी जिसके प्रति उसकी मां का प्यार बहुत ज्यादा था क्योंकि माँ के लिए उसकी संतान चाहे जैसी भी हो उसका प्यार सबके लिए समान होता है।ममता की मूर्ति माँ स्वयं अपना सुख छोड़ कर अपने बच्चों में खोई रहती है। मंगु के अलावे उसकी मां को तीन और संताने थी। मंगु अपने भाइयो के बेटों के साथ साथ रहती है और बच्चे अपने दादी का प्यार पाना चाहते थे परंतु वह सारा दिन मंगु की देख रेख में लगी रहती थी जिसे देख कर उनकी बहुए अपने सास से झगड़ा कर लेती थी और मंगु को अस्पताल में भर्ती करवाने को बोलती थी ।
Q3. कुसुम के पागलपन में सुधार देख मंगु के प्रति माँ परिवार और समाज की प्रतिक्रिया को अपने शब्दो में लिखे।
उत्तर:- कुसुम एक पढ़ने लिखने वाली लड़की थी किसी कारण अचानक वह पागल की तरह व्यवहार करने लगी थी । कुसुम को अस्पताल में भर्ती की बात सुनकर मंगु की सोचती की अगर कुसुम की माँ जिन्दा होती तो उसे अस्पताल में भर्ती न होने देती । कुसुम अस्पताल में भर्ती हो गइ और डॉक्टर की देख रेख में वह ठीक भी होने लगी ।जब वह ठीक हो गई तो वह अपने घर लौट आई ।जिसे देख और समाज के लोगो की बातों को सुन कर मंगु की माँ भी मंगु को अस्पताल में भर्ती करवाने को तैयार हो गई।
Q4. मंगु जिस अस्पताल में भर्ती की जाती है, उस अस्पताल के कर्मचारी व्यवहार कुशल है या संवेदनशील? विचार करे।
उत्तर:- जिस अस्पताल में मंगु भर्ती की जाती है उस अस्पताल के कर्मचारी संवेदनशील है।उनका काम ही है मरीजो की सेवा करना और उनके साथ अच्छे व्यवहार करना।अस्पताल वाले चाहते हैं कि मंगु की माँ घर चली जाए और उनकी बेटी को अच्छे से इलाज किया जा सके।परन्तु मंगु की माँ मन ही मन सोचती हैं कि पागल का ऐसा स्वजन अभी तक नहीं आया है।एक अधेड़ परिचारिका उसे अपनी बेटी समझने लगती है और उसका इलाज करती है।
Q5. कहानी का सारांश प्रस्तुत करें।
उत्तर:- "माँ" कहानी पाठ के लेखक ईश्वर पेटलिकर जी है ।
इस कहानी में उन्होंने माँ की ममता का सजीवात्मक चित्रण किया है।जन्म से पागल और गूंगी बेटी को जिस तरह पाल-पोस रही है वह अकथनीय है।अपनी सारी खुशियां उन्हें अपनी बेटी की खुशि में ही दिखती है।मंगु के अलावा बेटा-बेटी,पोता-पोती होते हुए भी वह पूरी तरह मंगु पर ही समर्पित है।यह देख इनकी बहुए गुस्सा भी करती थी तथा मंगु को अस्पताल में भर्ती कवने को बोलती थी पर उसकी माँ मंगु को अस्पताल में भर्ती करवाने से डरती थी ,क्योंकि उन्हें डर होता था कि अस्पताल के कर्मचारी इसकी सही से देख भाल नही कर सकते है और मंगु की माँ अस्पताल को गौशाला का दर्जा भी देती थी।परंतु कुसुम की तबियत ठीक होने और गाँव के लोगो की बातों को सुन कर माझी अपनी बेटी को भी अस्पतला में भर्ती करवा देती है ।
Q6. कहानी के शीर्षक की सार्थकता पर विचार करें।
उत्तर:- हर कहानी का शीर्षक उसके कहानी के ईर्द-गिर्द ही होता है। जैसी इस कहानी का है "माँ" । इस कहानी में माँ की ममता का बखूबी से माँ के प्यार का चित्रण किया गया है।जन्म से पागल और गूंगी बेटी की सेवा तन-मन से करती है। जन्मदात्री हो का वह हर अक्षरशः पालन करती है।घर में बेटी-बेटे,बहु,पोता पोती से उसका सम्बन्ध सही होते हुए भी सब उससे खुश न थे क्योंकि माँ का सारा ध्यान अपनी पागल बेटी के ऊपर है। वे समझते है कि माँ पानी पागल बेटी के साथ खुद पागल हो गइ है।जब कुसुम अचानक पागल हो गई और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वह ठीक हो गई यह देख सभी मंगु को भी अस्पताल में भर्ती करवाना चाहते हैं परंतु माँ अपनी पागल बेटी को अस्पताल में भर्ती कराने से डरती है वह कहती है अस्पताल में इसकी कौन देख भाल करेगा।संतान कैसी भी हो परन्तु माँ की ममता में कही भी कमी नही आती है।इससे स्पष्ट है कि प्रस्तुत कहानी का शीर्षक सार्थक है।

Thanks you so much sir.....
ReplyDeleteWelcome
Deleteisse ham apna qu.banane me help kiya thanks
ReplyDeletemangu ki bri sister ka kya name tha
ReplyDeleteKamu name thi
DeleteHistory books nahi h
ReplyDelete