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Thursday, 6 December 2018

तत्वो का आवर्ती वर्गीकरण




     
 =>   प्रारंभ में बहुत ही कम तत्व ज्ञात थे जिनका अलग-अलग अध्ययन करना काफी सरल था परंतु आज के समय में 118 से भी अधिक तत्व ज्ञात हो चुके हैं जिनका अलग-अलग अध्ययन करना काफी कठिन है इसलिए इन्हे वर्गीकृत किया जा रहा है ताकि सभी तत्वो को सुगमता पूर्वक अध्ययन किया जा सके ।तत्वो के वर्गीकरण से लाभ -

1 सभी तत्वो का अलग-अलग अध्ययन किया जा सकता है।
2 सभी तत्वो के गुणों का अध्ययन नियमित तरीके से किया जा सकता है।
3 किसी समूह के तत्वो के गुणों में क्रमिक परिवर्तन को समझना आसान हो जाता है।


          वर्गीकरण के प्रारंभिक प्रयास


=>  सर्वप्रथम 18वी शताब्दी में लभ्वाजे नामक वैज्ञानिक ने तत्वो को धातु और अधातु के रूप में वर्गीकृत किया,परन्तु कई करणो वश यह प्रयास सफल न हो सका।

                त्रियक नियम

=> 19वी शताब्दी में जर्मन वैज्ञानिक डोबरेनर ने तत्वो को तीन-तीन के समूह वर्गीकृत कर एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे त्रियक नियम या डोबरेनर का त्रियक नियम कहते है।
       इस नियम के अनुसार -  तत्वो को परमाणु  द्रव्यमान के क्रम में सजाने पर मध्यवर्ती तत्व का परमाणु द्रव्यमान किनारे वाले शेष दोनों तत्वो के परमाणु द्र्व्यमान का औसत होता है।
   जैसे:- क्लोरीन (35.5) ,ब्रोमीन (80) ,आयोडीन (127)

जब क्लोरीन और आयोडीन के परमाणु द्रव्यमानों का औसत लगभग बिच वाले तत्व ब्रोमीन के परम्माणु द्र्व्यमान के बराबर  आता है।
    (35.5+127)  ÷ 2 = 81.25



परन्तु कई कारणों के कारण इनका यह प्रयास सफल न हो सका।


                  अष्टक  नियम

=> अंग्रेज रसायनशास्त्री न्यूलैंडस ने अपने समय तक अविष्कृत तत्वो को उनके परमाणु द्र्व्यमान के क्रम में सजा कर एक नियम का प्रतिपादन किया जिसे न्यूलैंड्स का अष्टक नियम कहते हैं। इस नियम के अनुसार -----
                     यदि तत्वो को उनके परमाणु द्रव्यमान के क्रम में सजाया जाए तो , किसी तत्व से प्रारंभ करने पर आठवे तत्व का गुण पहले तत्व के गुणों के समान होता है।
   जैसे:- Na से गिनने पर आठवाँ तत्व K होता है। इन दोनों के गुण समान होते हैं।



         दमित्री इवानोविच मेंडलीव

=> 8 फरवरी 1834 ई° में दमित्री इवानोविच मेंडलीव का जन्म रूस के साइबेरिया के टोबोलस्क में हुआ था। प्रारम्भिक  शिक्षा ग्रहण करने के बाद माँ के प्रोत्साहन से विश्वविद्यालय में दाखिला करवाया ।सन 1856 में स्नातक पास कर 1865 में पी. एच .डी की उपाधि प्राप्त की।
                       इन्होंने तत्वो के आवर्त नियम का प्रतिपादन किया जिसके आधार पर आवर्त सरणी का निर्माण किया गया जो आज विश्व में मान्यता प्राप्त चुकी है।


              मेंडलीव का आवर्त नियम

=> रुसी वैज्ञानिक मेंडलीव ने सन 1869 इ में तत्वो के भौतिक एवम रासायनिक गुणों का अध्ययन करके तत्वो के वर्गीकरण कि एक नयी प्रणाली को विकसित किया और इसके निष्कर्ष के आधार पर एक नियम का प्रतिपादन किया  जिसे मेंडलीव का आवर्त नियम कहते हैं।
                 यदि तत्वो को उनके बढ़ते हुए परमाणु द्र्व्यमान के क्रम में सजाया जाए तो एक निश्चित संख्या के बाद समान गुण वाले तत्व पाए  जाते हैं , इसे मेंडलीव ने सरणी बद्ध किया जिसे मेंडलीव का आवर्त सरणी नियम कहते हैं।


* इस सारणी के उदग्र भाग को वर्ग कहते हैं। जिनकी संख्या 9 है।

* इस सारणी  के क्षैतिज भाग को आवर्त कहते हैं। जिसकी संख्या 7 है।


      मेंडलीव के आवर्त सारणी के गुण

=> मेंडलीव के आवर्त सारणी के गुण इस प्रकार है---

नए तत्वो का पूर्वानुमान  :--  इन्होंने अपने सारणी का निर्माण करते समय अज्ञात तत्वो के लिए कुछ रिक्त स्थान छोड़ दिए थे और इन्होंने भविष्यमानी किया था कि नए आविष्कार होने वाले तत्व इसी में रखे जाएंगे ।
जैसे:- स्कैन्डियम (Sc), जर्मेनियम(Ge) ,गैलियम (Ga).


तत्वो की संयोजकता  :-- इस आवर्त सारणी के किसी वर्ग विशेष के सभी तत्वो की संयोजकता एक ही होती है और किसी आवर्त में यह क्रमिक रूप से परिवर्तित होता है।


परमाणु द्रव्यमान में सुधार :-- इन्होंने अपने आवर्त सारणी में कुछ गलत द्रव्यमान वाले तत्वो को उनके अन्य गुणों को ध्यान में रख कर उचित स्थान पर रखा, जिससे इस आवर्त सारणी के आधार पर उन तत्वो का ठीक-ठीक परमाणु द्रव्यमान ज्ञात किया गया।
 जैसे :- बेरिलोयम(Be) ,इंडियम(In).

अनुसंधान कार्यो में सहायता :-- रसायन शास्त्र के क्षेत्र में अनुसंधान करने वाले वैज्ञानिको के लिए यह सारणी बहुत उपयोगी प्रमाणित हुई।

नियमित अध्ययन में सुविधा :-- मेंडलीव की आवर्त सारणी से तत्वो और उनके गुणों का अध्ययन करना काफी आसान हो गया।यदि किसी वर्ग के किसी तत्व और उसके यौगिको के गुणों की जानकारी हो जाने के बाद दूसरे तत्वो के यौगिको के उनके गुणों का पूर्व अनुमान लगाया जा सकता है।



    मेंडलीव के आवर्त सारणी में दोष

=> इस सारणी के दोष इस प्रकार है----

1 हाइड्रोजन का स्थान :---               आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान सुनिश्चित नही है। इसका गुण कुछ क्षार धातुओं के समान होता है जिसके कारण इसे वर्ग 1 के A में रखा गया है लेकिन यह हैलोजन जैसे तत्वो के जैसा भी गुण रखता है ,परन्तु इसे वर्ग 7के A में नही रखा गया है।


2 तत्वो के असंगत युग्म :---  मेंडलीव ने तत्वो को बढ़ते हुए परमाणु द्र्व्यमान के क्रम में सजाया है परंतु यह कुछ तत्वो के साथ सही साबित नही होता है।
 जैसे :-- ऑर्गन , पोटैशियम , कोबाल्ट ,निकेल आदि।



3 मृदा तत्वो का स्थान :-- मृदा तत्वो को दो श्रेणियों में बांटा जाता है-----
लैन्थेनाइट्स :--परमाणु संख्या 57 से 71 तक के तत्वो को लैन्थेनाइट्स कहा जाता है।

एक्टिंनाइड्स :--- परमाणु संख्या 90 से 103 तक के तत्वो को एक्टिं नाइड्स कहा जाता है।
              यदि इन्हे परमाणु द्र्व्यमान के बढ़ते क्रम में रखा जाए तो आवर्त सारणी का महत्व ही समाप्त हो जाएगा ।


4    कुछ समान तत्वो को एक साथ नही असमान तत्वो को एक साथ रखा गया है।
    जैसे :- आवर्त सारणी में Cu  और Hg को अलग-अलग रखा गया है परंतु ये समान गुण वाले हैं।लेकिन Cu और Ag के गुण अलग-अलग है परंतु इन्हे एक साथ रखा गया है।


5   समस्थानिक का स्थान :-- इस सारणी में समस्थानिकों का स्थान सुनिश्चित नही है।


*  इन दोषों के आधार पर कहा जा सकता है कि तत्वो के वर्गीकरण का आधार परमाणु द्र्व्यमान नही हो सकता है।



       मोसले की आधुनिक आवर्त सारणी

=>   सन 1913 में मोसले नामक वैज्ञानिक ने कैथोड किरणों को किसी तत्व पर बौछार कराया जिससे एक नई किरण निकलने लगी,जिसे X-किरण के मन से जाना जाता है।जिस तत्व पर कैथोड किरणों का बौछार कराया गया उन्हें एंटीकैथोड कहा जाता है।
                       इन्होंने अनेक एंटी कैथोडो का प्रयोग कर पाया कि तत्व की प्रकृति के अनुसार विभिन्न कम्पन वाली X-किरणे निकलती है। X-किरणों की कम्पन और परमाणु द्रव्यमान के बीच लेखाचित्र खीचा तो पाया कि रेखा सीधी प्राप्त नही होती है परंतु इस लेखाचित्र को परमाणु संख्या के बीच खीचा तो रेखा सीधी प्राप्त हुई। इसके आधार पर उन्होंने यह स्पष्ट किया कि परमाणु द्रव्यमान नहीं बल्कि परमाणु संख्या तत्वो के वर्गीकरण का आधार हो सकते है और इस आधार पर एक नियम प्रतिपादित किया जो इस प्रकार है----
           तत्वो के भौतिक गुण एवम रासायनिक गुण उनकी परमाणु संख्या के आवर्त फलन होते हैं।इस नियम को उन्होंने सारणी बद्ध किया जिसे मोसले का आधुनिक आवर्त सारणी कहते है।


=> इन्होंने अपने आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वो को परमाणु संख्या के आधार पर सजाया है।जिसमे 18 वर्ग और 7 आवर्त है।

* प्रथम आवर्त में हाइड्रोजन (H) एयर हीलियम (He) को रखा गया है।जिसकी परमाणु संख्या 1और 2 है।

* द्वितीय आवर्त में Li(3) से Ne(10) तक 8 तत्व है तथा तृतीय आवर्त में Na(11) से Ar(18) तक 8 तत्व है । इन्हे लघु आवर्त कहा जाता है।

* चतुर्थ आवर्त में K (19) से Kr(36)  तक 18 तत्व है।
* पंचम आवर्त में Rb(37) से Xe(54) तक 18 तत्व है।
* षष्टम आवर्त में Cs(55) से Rn(86) तक  32 तत्व है।
* सप्तम आवर्त में Fr(87) से प्रारम्भ होता है।इसमें सभी 25 तत्व है यह आवर्त अभी अपूर्ण है।


नोट:- चतुर्थ एवम इसके बाद सभी आवर्त दीर्घ आवर्त कहलाते है।

* इस सारणी के नीचे दो कतारों लैन्थेनाइड्स और एक्टिंनाइड्स को रखा गया है जो वर्ग तीन के सदस्य है।

* वर्ग 1,2,3 और 13-17 वाले सामान्य तत्व ,वर्ग 3 से 12 तक के तत्व संक्रमण तत्व ,वर्ग 1 के तत्व क्षार धातुए, वर्ग 2 के तत्व क्षारीय मृदा धातुए ,वर्ग 17 के तत्व हैलोजन्स और वर्ग 18 के तत्व उत्कृष्ट गैस कहलाते है।

* इस सारणी में धातु और अधातु को अलग-अलग रखा गया है।

* इस सारणी को चार ब्लॉक में बांटा गया है।जिसका नाम s,p,d और f दिया गया है

* s ब्लॉक में वर्ग एक और दो के तत्व आते है।
* p ब्लॉक में वर्ग 13 और 18 के तत्व आते हैं।
* d ब्लॉक में वर्ग 3 और 12 के तत्व आते हैं।
* f ब्लॉक में लैन्थेना इड्स और एक्टिं नाइड्स क़्यो रखा गया है।


          मोसले की आवर्त सारणी की विशेषताए


            मोसले की आवर्त सारणी की विशेषताए इस प्रकार है------

1 भौतिक गुण  :--- किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर धात्विक तत्वो के भौतिक गुण घटते है लेकिन उनका घनत्व बढ़ता है।

रासायनिक क्रियाशीलता :--- किसी वर्ग में ऊपर से नीचे नीचे आने पर धातुओं की क्रियाशीलता घटती है ।

धातुई गुण :---- किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर तत्वो के धातुई गुण बढ़ते हैं।

4 इलेक्ट्रॉनिक विन्यास :--- किसी वर्ग विशेष के सभी तत्वो के बाह्य इलेट्रॉनिक विन्यास समान होते हैं।

5 संयोजकता :--- किसी वर्ग के सभी तत्वो की संयोजकता समान होती है।

6 विधुत ऋणात्मकता :--- सह संयोजक बंधन से जुड़े इलेक्ट्रॉन युग्म को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को विधुत ऋणात्मकता कहलाती है।
                    किसी आवर्त में बाए से  दाए जाने पर तत्व की विधुत ऋणात्मकता बढ़ती है।

7 परमाणु का आकार :---- आवर्त ने के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु का आकार बढ़ता है।

8 आयनन ऊर्जा :----    आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर   से नीचे आने पर परमाणु का आकार बढ़ता है जिसके कारण  नाभिक और संयोजी इलेक्ट्रॉन के बीच की दुरी बढ़ती है।जिससे आसानी से परमाणु अपना इलेक्ट्रान खो कर धनायन बनने की प्रवृति रखता है।


नोट:--- मेंडलीव की आवर्त सारणी के कई दोष आधुनिक आवर्त सारणी से दूर हो गयी है। आधुनिक आवर्त सारणी को याद रखना आसान है जबकि मेंडलीव की आवर्त सारणी को याद करना आसान नही है।


       आधुनिक आवर्त सारणी के दोष

आधुनिक आवर्त सारणी के दोष इस प्रकार है----

1 हाइड्रोजन का स्थान :--- इस आवर्त में भी हाइड्रोजन का स्थान निश्चित नही है।
2 हीलियम का स्थान :--- हीलियम का स्थान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर वर्ग दो में क्षारीय मृदा धातुओं के साथ होना चाहिए लेकिन इसे उत्कृष्ट गैसों के साथ वर्ग 18 में रखा गया है।




* मेंडलीव की आवर्त सारणी और मोसले की आधुनिक आवर्त सारणी में अंतर स्पस्ट करे---------



              मेंडलीव की सारणी         
                                                                              1) इनकी  आवर्त सारणी           
परमाणु द्रव्यमान पर आधारित   
है।                                                                          2) इनमे 9 वर्ग और 7 आवर्त है।
3)इनके सारणी में दो उपवर्ग A
और B है।
4) इनके वर्गों को रोमन में
लिखा गया है।
5) इनके सारणी में तत्वो के
विभिन्न प्रकार को अलग-अलग
नही रखा गया है।

             मोसले की आवर्त सारणी

1) इनकी आवर्त सारणी परमाणु संख्या पर आधारित है।
2) इसमे 18 वर्ग और 7 आवर्त है।
3) इनके आवर्त सारणी में उपवर्ग नही है।
4) इनके वर्गों को 1,2,3,,,,,,से सूचित किया गया है।
5) इनके सारणी में तत्वो के विभिन्न प्रकारों को अलग-अलग रखा गया है।


  क्षार धातुए और हाइड्रोजन में समानताए

    क्षार धातु

1) यह विधुत धनात्मक  होता है।
2) यह अवकारक है।
3) ये हैलाइड बनाती है।
4) यह ऑक्साइड बनाता है।


       हाइड्रोजन             
1) यह भी विधुत धनात्मक होता है।
2) यह भी अवकारक है।
3) ये हैलाइड बनाता है।
4) यह भी ऑक्साइड बनाता है।



 हाइलोजन और हाइड्रोजन में समानताए

   हाइलोजन
1) यह अधातु है।
2) यह गैस है।
3) यह द्विक परमाणु अणु बनाता है।
4) यह धातुओं के साथ संयोग कर के हैलाइड बनाता है।

  हाइड्रोजन
1) यह भी अधातु है।
2) यह गैस है।
3) यह भी द्विक परमाणु अणु बनाता है।
4) यह हाइड्राइड बनाता है।
  

        

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