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Tuesday, 16 October 2018

Chapter =3 ऊर्जा के स्त्रोत (sources of energy)

                              Chapter =3

          ऊर्जा के स्त्रोत (sources of energy) 
इस अध्याय में हमलोग "ऊर्जा के स्त्रोत " के बारे में जानेगे ,परन्तु इसके पहले हम ऊर्जा के बारे में जान लेते है।

* ऊर्जा (energy):-   कार्य करने की क्षमताऊर्जा कहलाती है।यह एक अदीश राशि है तथा इसका S.I मात्रक "जुल" होता है।

* ऊर्जा के स्त्रोत (sources of energy):- वैसी वस्तु
जिनसे हमें ऊर्जा प्राप्त होती है,उसे ऊर्जा के स्त्रोत कहते है।
    जैसे :- कोयला,यूरेनियम,सूर्य,हवा,लकड़ी आदि।

* ऊर्जा के अच्छे स्त्रोत की मूल शर्ते इस प्रकार है-
1 जो सस्ता हो।
2 जो सुलभ हो।
3 जो कम मात्रा में भी अधिक कार्य करें।
4 जिसका भंडारण तथा परिवहन आसान हो।

* ऊर्जा का अच्छा स्त्रोत ईंधन (fuels) है।

* ईंधन (fuels):-     वह पदार्थ जो जलकर ऊष्मा उतपन्न करे उसे ईंधन कहते है। जैसे कोयला,लकड़ी,पेट्रोल आदि।

* अच्छे  ईंधन की मूल शर्ते इस प्रकार है:-
1 जो आसानी से प्राप्त हो।
2 जिसे जलने पर अधिक ऊष्मा मिले।
3 जो धुँआ उतपन्न न करे।
4 जिसके जलने पर विषैला पदार्थ न उतपन्न हो।
5 जिसका भंडारण और परिवहन आसान हो।

* ऊर्जा के परंपरागत स्रोत:- ऊर्जा
जिनका उपयोग आदि काल से होते आ रहा है, उसे ऊर्जा के परम्परागत स्त्रोत कहते है।
जैसे :-लकड़,कोयला आदि।

* जीवाश्म ईंधन (fossil fuels):- पृथ्वी के अंदर दबे पेड़-पौधे और पशुओं से प्राप्त ईंधन को जीवाश्म ईंधन कहते है।
जैसे:- कोयला,प्राकृतिक गैस,पेट्रोलियम आदि।

* ऊर्जा के निम्न दो स्त्रोत होते  है:-
1 अनवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत (Non-renewable sources of energy)

2 नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत (Renewable sources of energy)

*अनवीकरणीय ऊर्जा के स्त्रोत
=> ऊर्जा के वैसे स्त्रोत जिनकी मात्रा सिमित है तथा जो एक न एक दिन समाप्त हो जाएगे, इस प्रकार के ऊर्जा स्त्रोत को अनवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत कहते है।
जैसे:- जीवाश्म ईंधन

* नवीकरणीय ऊर्जा स्त्रोत:-   ऊर्जा के वैसे स्त्रोत
जिनकी मात्रा सिमित नही है जो किसी भी दिन समाप्त नही हो सकते है, उसे ऊर्जा के नवीकरणीय स्त्रोत कहते है।
जैसे:- सूर्य , हवा, पानी,आदि।

* ऊर्जा के वैकल्पिक स्त्रोत या गैर-परंपरागत स्त्रोत

* सौर ऊर्जा :- सूर्य से प्राप्त ऊर्जा सौर ऊर्जा कहलाती है।
जैसे:- सौर कुकर , सोलर लाइट, आदि।

                  सौर-कुकर या सोलर कुकर
=> सौर-कुकर धातु की दोहरी दिवार से बनी एक बॉक्स होती है जिसमे विशेष कोण पर एक समतल दर्पण लगा होता है ताकि सूर्य की किरणें इससे परावर्तित हो कर बॉक्स में ही पड़े।
         बॉक्स के भीतर दोहरी दिवारो के बीच ऊष्मारोधी पदार्थ लगा होता है तथा दीवारे काले रंग ऐ रँगी होती है, क्योंकि काला रंग ऊष्मा का अधिक अवशोषण करता है।जिस खाद्य पदार्थ को पकाने होता है, उसे विशेष के बर्तन जिसकी पेंदी काले रंग से रंगी होती है उसमें रख कर सौर कुकर में रख दिया जाता है और और कुकर को तेज धूप में रख दिया जाता है।
                सौर कुकर के लाभ 

सौर कुकर के लाभ इस प्रकार है-
1 यह सस्ता होता है।
2 इससे धुँआ उतपन्न नही होता है।
3 एक साथ कई खाध पदार्थ पकाया जा सकता है।
4 इसमे लकड़ी,lpg, की अवश्यक्ता नही होती है।

            सौर कुकर की हानियाँ
=> इसकी हानियां इस प्रकार है-
1 इसे केवल दिन में ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
2 जाड़े या बदल के दिनों में भोजन पकाने में लंबा समय लगता है।
3 इसमें तलने वाले पदार्थ नही पकाये जा सकते हैं।
4 इसमें रोटी भी नही पकाई जा सकती है।
5 गर्म जलवायु वाले क्षेत्र में ही केवल ठीक ढंग से इसका उपयोग हो सकता है।

* सौर-सेल (solar cell)  :-  वह यंत्र जो सौर ऊर्जा को  विधुत ऊर्जा मे रूपांतरित करे, उसे  सौर-सेेल कहते है।यह
सिलिकन का बना होता है।

                       सौर-सेल के लाभ
सौर -सेल के लाभ इस प्रकार है-
1 इसका उपयोग अंतरिक्ष में भेजे गए सभी उपग्रहों के लिए ऊर्जा के लिए किआ जाता है।
2 इसके लिए कम रख-रखाव की जरूरत होती है।
3 कम आबादी वाले क्षेत्रो में इसके द्वारा विधुत ऊर्जा की पूर्ति की जा सकती है।
4 इसका उपयोग सिग्नलों,खिलौनों,आदि में भी किया जाता है।
5 इसका कोई चल भाग नही होता है।
 
                    सौर-सेल की हानियां
इसकी हानियां इस प्रकार है-
1 कीमती होने के कारण इसका घरेलु उपयोग सिमित है।
2 इसके निर्माण की प्रक्रिया बहुत खर्चीली है।
3 सौर सेल बनाने के लिए प्रयुक्त सिलिकॉन की मात्रा काफी कम है।

नोट:- जब बड़ी मात्रा में सौर सेलो को संयोजित किआ जाता है तो इस व्यवस्था को सौर-सेल पैनल कहते है।

* नाभिकीय ऊर्जा (nuclear energy):-
=> नाभिकीय विखंडन द्वारा नाभिकीय ऊर्जा को उतपन्न किआ जाता है। इस प्र क्रिया के अंतर्गत किसी भरी परमाणु के ऊपर जब न्युट्रान को बंवर्षित किया जाता है तो भरी परमाणु हल्के नाभिकों में टूट जाता है जिससे विशाल मात्रा में ऊर्जा मुक्त होती है।
                यह काफी खर्चीला ,पर्यावरण संदूषण ,यूरेनियम की सिमित उपलब्धता के कारण बड़े पैमाने पर उपयोग नही हो पाता है।

नोट:-  यूरेनियम के एक परमाणु के विखंडन से मुक्त ऊर्जा कार्बन के एक  परमाणु से उतपन्न ऊर्जा के एक करोड़ गुना अधिक होता है ।

* नाभिकीय संलयन (nuclear fusion):-  जब दो
हल्के नाभिकों को एक साथ जोड़ा जाता है तो इस प्रक्रिया को नाभिकीय संलयन कहते है।

* भुऊष्मीय ऊर्जा (geothermal energy):-  पृथ्वी
के गर्भ में पिघले चट्टान ऊपर की ओर ढकेले जाते है जो किसी निश्चत जगहों में फँस जाते है जिसे गर्मक्षत्र या गर्म स्पॉट कहते है।
        जब पानी इन क्षत्रों के संपर्क ने जाता है तो भाप उतपन्न होने लगता है।इस भाप को पाइपो से निकाल कर टरबाइनों पर भेजा जाता है जिससे विधुत ऊर्जा का उत्पादन होता है।
इस प्रकार भुऊष्मीय ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदला जाता है।
भुऊष्मीय ऊर्जा के लाभ इस प्रकार है:-
1 यह प्रदूषण मुक्त होता है।
2 यह दिन-रात कार्य कर सकता है।
3 यह मुफ्त और नवीकरणीय ऊर्जा है।

* ज्वारीय ऊर्जा (tidal energy):- समुद्र के पानी का तल चंद्रमा के गुरुत्विय त्वरण के कारण उठता है और
गिरता है जिसे उच्च और निम्न ज्वार कहते है।
            सागर के निकट एक बांध बनाया जाता है जब सागर का पानी उठ कर गिरता है तो बाँध का द्वार बंद कर दिया जाता है जिससे बाँध में पानी का तल बढ़ जाता है और पुनः द्वार को खोल दिया जाता है एवम पानी को टरबाइन ऐ हो कर गुजारा जाता है।इस प्रकार ज्वारीय ऊर्जा को विधुत ऊर्जा में बदला जाता है।

* तापीय शक्ति संयंत्र (thermal power plant):-
इस प्रकिया द्वारा ऊष्मा ऊर्जा, को विधुत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है।
        इसके लिए बड़ी मात्रा में जीवाश्म ईंधनों को जलाकर पानी को गर्म किआ जाता है तथा इससे उतपन्न भाप का उपयोग टरबाइन को  घुमाने के लिए किया जाता है।जिससे विधुत का उत्पादन किआ जाता है।

* जल-शक्ति संयंत्र (hydropower plants):-   गिरते हुए पानी के स्थितिज ऊर्जा को विधुत ऊर्जा मेंं बदलने की प्रक्रिया को जल शक्ति संयंत्र कहते है।
                 इस प्रक्रिया के अंतर्गत बाँध बनाकर पानी को उच्चे तल तक उठाया जाता है और पानी को पाईप द्वारा विधुत जनित्र के टरबाइन तक पहुँचाया जाता है जिससे टरबाइन घूमने लगता है और विधुत ऊर्जा का उत्पादन होता है।
                   जल विधुत से लाभ 
जल विधुत के निम्म लाभ इस प्रकार है-
1 यह एक नवीकरणीय स्त्रोत है।
2 यह प्रदूषण मुक्त है।
3 इसकी कीमत कम है।
4 इसके लिए बनाया गया बाँध बाढ़-नियंत्रण और सिचाई में सहायक होता है।

              जल विधुत की हानियाँ

इसकी हानियां इस प्रकार है-
1 इसे हर जगह नहीं लगाया जा सकता है।
2 बाँध टूटने से बाढ़ का खतरा बना रहता है।
3 पानी में सड़े गले वनस्पतियो के कारण मेथेन गैस की उतपत्ति होती है जो एक ग्रीन हाउस गैस है।

ग्रीन हाउस प्रभाव (greenhouse effect):-  वायुमण्डल में मौजूद कार्बनडाइऑक्साइड (co2) की मात्रा अवरक्त विकिरण को पृथ्वी पर आने देती है जिससे पृथ्वी की सतह गर्म हो जाती है और पृथ्वी पुनः इस विकिरण को उत्सर्जित करती है परंतु कार्बनडाइऑक्साइड से टकराकर पुनः पृथ्वी पर ही लौट जाती है जिससे पृथ्वी का तापमान सूर्यास्त के बाद भी कम नहीं हो पाता है।अतः ये घटना ग्रीनहाउस प्रभाव कहलाती है।

पवन  ऊर्जा:-    पवनों से प्राप्त ऊर्जा को पवन ऊर्जा कहते है। यह ऊर्जा का नवीकरणीय  स्त्रोत है।
                 जब बड़े क्षत्रे में एक साथ कई पवन चक्कियों को लगाया जाता है तो उसे पवन ऊर्जा फार्म कहते है।

                  पवन ऊर्जा की सीमाएं
 इसकी निम्न सीमाएं है:-
1 इसे हर जगह नहीं लगाया जा सकता है।
2 इसे लगाने के लिए पवन की गति 15km/h होनी चाहिए।
3 इसके लिए बड़े जगह की अवश्यक्ता होती है।
4 लागत भी अधिक होता है ।

नोट :- डेनमार्क को पवनों का देश कहा जाता है तथा यहां विधुत की 25•/• की आपूर्ति पवन चक्की से ही किया जाता है।
     जर्मनी इन मामलो में अग्रणी है जाकी भारत 10वे स्थान पर है।

                        बायोगैस संयंत्र
=> इस प्रक्रिया द्वारा गोबर से गैस उतपन्न किया जाता है जिसे गोबर गैस या बायोगैस संयंत्र कहते है।यह ऊर्जा का नवीकरणीय स्त्रोत है।
               इस प्रक्रिया के अंतर्गत ईंट से बने एक गुम्बद में पानी और गोबर के  गारा को टंकी में दाल दिया जाता है जिससे गारा पाचित में पहुँच जाता है।यहाँ ऑक्सीजन न होने के कारण यह गारा विघटित हो कर मेथेन ,कार्बनडाई ऑक्साइड ,हाइड्रोजन और हाइड्रोजन सल्फाइड में परिवर्तित हो जाता है।इन गैसों को गैस टंकी में एकत्रित कर पाइपो द्वारा उपयोग के लिए भेजा जाता है।

नोट :- बायोगैस में 75•/• तक मेथेन गैस होता है जो उत्तम ईंधन है तथा बिन धुँआ के जलता है।

इससे निम्न लाभ होता है-
1 यह सस्ता होता है।
2 यह सुविधाजनक है।
3 इसे आसानी से बना सकते हैं।

जीवद्र्वमान (बायोमास) :- ईंधन के वैसे स्त्रोत जो पशुओं या पौधों के उत्पाद से प्राप्त किए जाते है, उसे बायोमास कहते है।

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