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Friday, 9 November 2018

परिवहन (transport )

                " परिवहन (Transport) "


=>  जीवों में उपापचयी क्रियाओं के संपादन के लिए उपयोगी पदार्थों को उनके मूल स्रोत से प्राप्त कर प्रत्येक कोशिकाओं तक पहुचाने तथा अनुपयोगी एवमं हानिकारक पदार्थों को कोशिकाओं से निकाल कर गंतव्य स्थान तक पहुचाने की क्रिया को  परिवहन कहते है।

=> ऐसे कार्यो के संपादन के लिए जीवों में विकसित तंत्र को "परिवहन तंत्र ( transport system)" कहते है।



                         मानव में परिवहन

=> साधारण भाषा में समझे तो परिवहन का अर्थ होता है- वास्तु को एक जगह से दूसरे जगह ले जाना । ठीक उसी प्रकार सभी जीवों के शरीर में भी पदार्थों को एक जगह से दूसरे जगह  भेजा जाता है।

=> रक्त,रक्त वाहिनियाँ और हृदय मिलकर रक्त परिवहन तंत्र या परिसंचरण तंत्र का निर्माण करती है।


=> रक्त (blood)  :-   यह लाल रंग का गाढ़ा        तरल पदार्थ है जो रक्त वहिनियो में प्रवाह करता है।इसकाph मान
7.4 होता है।
            यह अपने बहाव के दौरान सभी ऊतकों का संयोजन करता है, इसलिए इसे "तरल संयोजी ऊतक "  भी कहा जाता है।

* इसके दो प्रमुख घटक होते है:-
1 तरल भाग जिसे प्लाज्मा कहते है।
2 ठोस भाग जिसमे Rbc, wbc, रक्त पट्टीकाणु होते है।


* प्लाज्मा (plasma)  :-  यह  हल्के पीले रंग का चिपचिपा द्रव है जिसमे 90•/• जल,7•/• प्रोटी न , 0.9•/• अकार्बनिक लवण , ग्लूकोस , वसा तथा कार्बनिक पदार्थ होते है।
         प्लाज्मा में मौजूद  प्रोटीन को प्लाज्मा प्रोटीन कहते है।
 जैसे :- प्रोथोबिंन ,हिपैरिन आदि।

=> जब प्लाज्मा से फाईब्रिनोजिन अलग हो जाता है तो प्लाज्मा का शेष भाग सीरम कहलाता है।

=> ये प्रोटीन रक्त को थक्का बनाने में सहायक होते है।

* लाल रक्त कोशिकाएं ( red blood cells /RBC ) 

=> इसमे ही              (haemoglobin)  पाया जाता है जिसके कारण इसका रंग लाल होता है। इसे ऑक्सिजन का वाहक भी कहा जाता है । RBC में ।।           नही होता है।



* श्वेत रक्त कोशिकाये (white blood cells/ WBC)

:- इसमे हीमोग्लोबिन नही पाया जाता है जिसके कारण यह रंगहीन होता है।इसकी संख्या rbc से कम होती है।

=> रक्त पत्तिकाणु रक्त के थक्का बनने में सहायक होते है।इसे थ्रोम्बोसाइट भी कहते है।


*         Wbc और  RBC में अंतर 
Wbc और rbc में अंतर इस प्रकार है -


 Wbc

1 इसमें हीमोग्लोबिन नही होता है।
2 इसका निर्माण अस्थिमज्जा में होता है।
3 यह रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है।
4 इसकी मृत्यु 5-6 दिन में हो जाती है।
5 इसका रंग ऊजला होता है।


        Rbc

1 इसमे हीमोग्लोबिन होता है।
2 इसका निर्माण प्लीहा में होता है।
3 यह ऑक्सिजन का वाहक होता है।
4 इसकी मृत्यु 120 दिनों में हो जाती है।
5 इसका रंग लाल होता है।


               " मानव हृदय (human heart ) "
   













 => यह कोमल मांसल रचना है जो वक्षगुहा के मध्य में पसलियों के नीचे तथा दोनों फेफड़ो के बीच स्थित होता है।
इसका आकार तिकोना होता है।जो आगे से चौड़ा तथा नीचे से सँकरा होता है ।साथ ही यह बाई तरफ झुका होता है।

=> ह्रदय पेरिटोनियम की दोहरी झिल्ली से बंद होता है, जिसे हृदय आवरण या पेरिकार्डियल  कहते है। इन झिल्लियो के बीच की गुहा पेरिकार्डियल गुहा कहलाती है जिसमे एक द्रव भरा होता है, जिसे पेरिकार्डियल द्रव कहते है।
                      यह हृदय को बाहरी आघातों से तथा हृदय एवम पेरिकार्डियल झिल्ली के बिच होने वाले घर्षण से बचाता है।


=> हृदय चार वेश्मो में बांटा होता है-
1 दाया अलिंद ( right auricle)
2  बाया अलिंद ( left auricle)
3 दाया निलय ( right ventricle)
4 बाया निलय ( left ventricle)

=>  दाया और बाया अलिंद दोनों हृदय के चौड़े भाग में होते हैं तथा अंतरा अलिंद भीति या सेप्टम द्वारा एक -दूसरे से अलग होते है।
                 हृदय के कार्य 

=> हृदय शरीर के सभी भागों से अशुद्ध रक्त को ग्रहण कर ऑक्सिजन के माध्यम से फेफड़ो में भेजता है तथा पुनः शुद्ध रक्त को फेफड़ो से ग्रहण कर शरीर के सभी भगो में पम्प कर देता है। इसलिए इसे पम्प अंग भी कहा जाता है।

=> ह्रदय के वेश्मो का संकुचन ( contraction) सिस्टोल कहलाता है तथा शिथिलन (relaxation) डायस्टॉल कहलाता है।

*       धड़कन ( heart beat) 

 =>  हृदय के वेश्मो का संंकुचन तथा शिथिलन मिलकर धड़कन कहलाती है।


E C G / विधुत- हृदय लेखी :- 


=>  हृदय में उतेजित विधुत - धारा को जिस यंत्र से मापा जाता है उसे विधुत - हृदय लेखी या एलेक्ट्रोकार्डियोग्राफ या E C G कहते है।




                       रक्त वाहिनियाँ

 => रक्त के परिसंचरण के लिए शरीर में तीन प्रकार की रक्त वाहिनियाँ होती है -

1 धमनिया ( arteries)
2 रक्त केशिकाएं ( blood capillaries)
3 शिराएं ( veins)


* धमनी ( arteries)  :- इसकी दीवारे मोटी तथा लचीली होती है।  यहशुद्ध रक्त को हृदय से शरीर के विभिन्न भागो में ले जाती है ।

=> फुफ्फुस धमनी एक अपवाद है जो अशुद्ध रक्त को फेफड़ो से हृदय में ले जाती है।

शिराएं ( veins)  :-  यह अशुद्ध रक्त को शरीर के विभिन्न भागों से हृदय की ओर ले जाती है परंतु फुफ्फुस शिराएं अपवाद है जो शुद्ध रक्त को फेफड़ो से हृदय में ले जाती है।


* रक्तचाप ( blood presaure)  :- महा धमनी एवम उनकी मुख्य शाखाओं में रक्त प्रवाह का दबाव ' रक्तचाप ' कहलाता है।
            यह एक विशेष प्रकार के यंत्र से मापा जाता है जिसे रक्त दाब मापी या सिफग्मोमैनों मीटर कहते है।

=> एक स्वस्थ व्यक्ति का रक्तचाप 120/80 होता है।


                  पौधों में पदार्थो  का परिवहन 

=> एक कोशिकीय जीवो या सरल बहुकोशिकीय जीवों में पदार्थों का परिवहन विसरण द्वारा होता है।

=> जटिल बहुकोशिकीय जीवों में जल तथा खाद्य पदार्थों के परिवहन के लिए जाइलम एवम फ्लोएम के रूप में विशेष प्रकार का परिवहन तंत्र होता है जो जड़ से लेकर तना, पत्तियों तक में फैला होता है।


=> जाइलम द्वारा जड़ से जल तथा खनिज- लवण को अवशोषित कर पत्तियों तक पहुचाया जाता है, जबकि फ्लोएम के द्वारा प्रकाश -संश्लेषण क्रिया द्वारा तैयार खाद्य पदार्थ को पत्तियों से पौधों के विभिन्न भागों तक पहुचाया जाता है।


=> जाइलम तथा फ्लोएम को संवहन - बंडल भी कहा जाता है।


*     जाइलम तथा फ्लोएम मे अंतर 


   जाइलम

1 इसकी कोशिकाएं मृत होती है।
2 यह जल और खनिज का स्थानांतरण करता है।
3 इसमे जल और खनिज लवण का बहाव ऊपर की ओर होता है।
4 इसमे जल और खनिज लवण का एकदिशिय बहाव होता है।


     फ्लोएम

1 इसकी कोशिकाएं जीवित होती है।
2 यह खाद्य पदार्थों का स्थानांतरण करता है।
3 इसमे खाद्य पदार्थों का बहाव द्विदिशीय होता है।
4 इसमे खाद्य पदार्थो का ऊपर से नीचे दोनों तरफ परिवहन होता है।



* स्थानांतरण ( translocation) :- पौधों में जल , खनिज लवण  एवम खाद्य पदार्थों का बहुत ऊँचाई तक संचालन को स्थानांतरण कहते है।

* वाष्पोत्सर्जन ( transpiration) :- वह क्रिया जिसके अंतर्गत पौधों के वायवीय भागो से रंध्रों द्वारा जल का वाष्प के रूप में निष्कर्षण वाष्पोत्सर्जन कहलाता है।

1 comment:

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