Q1. पाप्पाति कौन थी और वह शहर क्यों लायी गई थी?
ऊतर:- पाप्पाति वल्सि अम्मारण की बेटी थी जो मेनिनजाइटिस से पीड़ित थी। वह शहर में इलाज के लिए लायी गयी थी।
Q2. वल्सि अम्मारण का चरित्र -चित्रण करे ।
उत्तर:- वल्सि अम्मारण एक विधवा नारी है जो बीमार बेटी को इलाज कराने के लिए गाव से नगर ले आती है। वल्सि अम्मारण पढ़ी-लिखी नही थी ।वह अंधविश्वास में डूब जाती है। अस्पताल में भर्ती न मिलने के कारण वह भगवान से मन्नत मांगती है और अपनी बेटी को झाड़-फूंक करवाती है। क्योंकि उसे विश्वास था कि झाड़-फुक से उसकी बेटी ठीक हो जाएगी।
Q3. बड़े डॉक्टर के आदेश के बावजूद पाप्पाति अस्पताल में भर्ती क्यों नही हो पायी?
उत्तर:- अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण पाप्पाति अस्पताल में भर्ती नही हो पाती है।अस्पताल के कर्मचारी का गरीब लोगो पर ध्यान ही नही देते हैं हर कर्मचारी दूसरे पर अपना काम सौप देते है तथा बेड खाली न होने का बहाना बनाकर उसकी भर्ती नही लेते हैं।
Q4. लेखक ने कहानी का शीर्षक 'नगर' क्यों रखा? शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट करे।
उत्तर:- इस कहानी में नगर की व्यवस्था का चित्रण किया गया है। एक रोगी गाँव से नगर इलाज के लिए आता है परंतु अस्पताल प्रशासन उसे टालमटोल कर देता है और उसकी भर्ती नही करता है।
वर्तमान समय में नगरीय जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अस्पताल के वरीय डॉक्टर उस रोगी को भर्ती करने का आदेश देते है पर कर्मचारी उसे अनदेखा कर देता है जिसके कारण वल्सि अम्मारण को अस्पताल का चक्कर काटना पड़ता है और हार कर अपनी बेटी को लेकर अस्पताल से चली जाती है।फुर्सत मिलने पर जब वरीय डॉक्टर उसकी भर्ती के बारे में पूछते हैं तो इस बात की खबर न होने पर वरीय डॉ क्रोधित हो कर कर्मचारियों को खोजने का आदेश देते हैं। नगर में रहने वाले लोग सिर्फ अपने ही सुख-सुविधा में लगे रहते हैं।इससे यह प्रस्तुत होता है कि कहानी का शीर्षक सार्थक है।
Q5. बड़े डॉक्टर के अपने अधीनस्थ डॉक्टर से पाप्पाति को अस्पताल में भर्ती कर लेने के लिए क्यों कहा? विचार करे।
उत्तर:- वरीय डॉ का पद एक गरिमामयी पद होता है ।जिसे अपने अपने कर्तव्यो का निर्वहन करना पड़ता है । यदि वे ऐसा नही करेंगे हो अधीनस्थ डॉ मरीजो का अनदेखा करने लगेंगे तथा डॉ साहब उस बीमारी के बारे में शहर से पढ़ कर आये थे और वह चाहते थे की इसका आश्वस्त हो ताकि उनकी पढ़ाई सफल हो सके।इस कारण वह उसे भर्ती करवाना चाहते थे।

Nice sir godhuli ka bhi prasn Uttar bhejiye
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